Gulzar shayri in hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी

Gulzar shayri in hindi -दोस्तों आज हम आपके लिए पेश कर रहे हैं प्यार पर बेस्ट Gulzar shayri in hindi। गुलजार शायरी हिंदी में। गुलज़ार साहब की कुछ प्रसिद्ध शायरी और गज़ल।
अधिक प्यार शायरी, प्रेरक शायरी, दुखद शायरी संग्रह के लिए हमारे साथ बने रहें।

गुलज़ार साहब भारत के सबसे लोकप्रिय लेखकों में से एक हैं। इसके अलावा, सर्वश्रेष्ठ फिल्म निर्माता और गीतकार। गुलज़ार साहब हिंदी और उर्दू में हज़ारों खूबसूरत ग़ज़ल, शायरी, कविता, उद्धरण, अल्फाज़ और कविताएँ लिखते हैं। उनकी बातें हर किसी के दिल को छू जाती हैं। आज हमने गुलज़ार साहब की कुछ दिल को छू लेने वाली शायरी इकट्ठी की हैं।

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Gulzar Quotes in Hindi

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी

 

हजारों उलझने है राहों में, और कोशिशें बेहिसाब
इसी का नाम है ज़िंदगी, बस चलते रहिए जनाब
हिचकियों में वफ़ा ढूंढ रहा था कमबख्त
गुम हो गई दो घूँट पानी से
ना जाने कैसे परखता है मुझे मेरा खुदा, इम्तिहान कड़क लेता है और हारने भी नहीं देता
ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में

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किसी के लिए भी खुली-किताब मत बनना,
टाइमपास का दौर है साहब पढ़कर फेंक दिये जाओगे।
कब आ रहे हो मुलाकात के लिए
मैंने चांद रोका है एक रात के लिए

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
मैं दिया हूं
मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अंधेरे से है
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ है
जिंदगी सस्ती है साहब
जीने के तरीके महंगे हैं
कैसे करें हम ख़ुद को तेरे प्यार के काबिल,
जब हम बदलते हैं, तुम शर्ते बदल देते ह
वो लोग वक्त के साथ बदल जाया करते है, जिन्हे हद से ज्यादा वक़्त दिया जाये
मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता,
हूँ मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती है
ज्यादा कुछ नहीं बदलता उम्र के साथ,
बस बचपन की जिद्द समझौतों में बदल जाती हैं

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है
तुम्हें यह जिद थी कि हम बुलाते
हमें यह उम्मीद वह पुकारे
आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
मिट्टी है यह मिट्टी
मिट्टी को मिट्टी में दफनाते हुए रोते हो क्यों?

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
कुछ बातें तब तक समझ में नहीं आती,
जब तक ख़ुद पर ना गुजरे
ज़िन्दगी सस्ती है साहब, जीने के तरीके महंगे हैं।
कितनी लंबी खामोशी से गुजरा हूं
उन से कितना कुछ कहने की कोषिश की
बहुत मुश्किल से करता हूं तेरी यादों का करोबार
मुनाफ़ा कम है लेकिन गुज़रा हो ही जाता है
कोई समझ तो एक बात कहूं साहब
तन्हाई सौ गुना बेहतर है मतबी लोगों से

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
आज की रात यूं थमी सी है
आज फिर आपकी कमी सी है
खुली किताब के ठीक उलटते रहते हैं
हवा चले ना चले दिन पलटते रहते हैं
ALSO CHECK OUT :
झूठे तेरे वादे पे बरस बिटे
जिंदगी से कटि,ये रात काट जाए

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा
काफिला साथ और सफ़र तन्हा
काँच के पीछे चाँद भी था और काँच के ऊपर काई भी
तीनों थे हम, वो भी थे और मैं भी था तन्हाई भी
यूँ तो हम अपने आप में गुम थे
सच तो ये है की वहां भी तुम थे
खुदा ने पुछा की क्या सजा दूं
उस बेवफा को,
हमने भी कह दिया बस उसे मोहब्बत हो जाये
किसी बेवफा से
कोइ पुछ रहा है मुझसे अब
मेरी ज़िन्दगी की किमत
मुझे याद आ रहा है
हलका सा मुसकुराना तुम्हारा
माना की तेरी नज़र में
कुछ नही हु मैं
मेरी कदर उनसे पूछो
जिनको पलट कर कभी नहीं
देखा मैंने सिर्फ तम्हारे लिए

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
ज़ख्म कहा कहा से
मिले है मुझको
ज़िन्दगी तू तो बता
सफ़र और कितना बाकी है
झूंठे तेरे वादों पर बरस बिताए
ज़िन्दगी तो काटी बस अब यह रात कट जाए
दिल अगर है तो दर्द भी होगा
इसका शायद कोई हल नहीं
लड़ाई किया करो 
नराज रहा करो
ज़िन्दगी है इसका भरोसा नहीं
साथ रहा करो

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
सोचो कितनी खूबसूरत होगी जिंदगी
जब दोस्त मोह्ब्बत और हमसफऱ तीनो एक ही इंसान हो
जब मिला शिकवा अपनों से तो ख़ामोशी ही भलीं
अब हर बात पर जंग हो यह जरुरी तो नहीं!
अगर कोई ज़ोर देकर पूछेगा
हमारी मोहब्बत की कहानी
तो हम भी धीरे से कहेंगे
मुलाक़ात को तरस गए
अगर कोई ज़ोर देकर पूछेगा
हमारी मोहब्बत की कहानी
तो हम भी धीरे से कहेंगे
मुलाक़ात को तरस गए

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
एक खूबसूरत सा रिश्ता खत्म हो गया
हम दोस्ती निभाते रहे और उसे इश्क़ हो गया
लोग पूछते हैं हमसे कि तुम कुछ बदल गए हो,
बताओ टूटे हुए पत्ते अब रंग भी ना बदलें क्या
मेरी ख़ामोशी में सन्नाटा भी है, शौर भी है
तूने देखा ही नहीं आँखों में कुछ और भी है
कोई तो चौक के देखे कभी हमारी तरफ ,

किसी की आँख में हमको भी इंतज़ार दिखे

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
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Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा,
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा
दिल के रिश्ते कभी नहीं टूटते
बस खामोश हो जाते हैं
शब्र करो जिसके तुम काबिल हो, वो हर चीज़ तुम्हें ज़िंदगी जरूर देगी
हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में,
रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया
चाहता हूँ मासूम बने रहना पर ये ज़िंदगी है कि समझदार किए जाती है।
पनाह मिल जाए रूह को जिसका हाथ छू कर

उस हथेली पर घर बना लो

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं,
रात भी आयी और चाँद भी था, मगर नींद नहीं
सहमा सहमा डरा सा रहता है,
जाने क्यूं जी भरा सा रहता है
तेरे प्यार की हिफाज़त कुछ इस तरह से की मैंने
जब भी किसी ने प्यार से देखा नजरें झुका ली मैंने
ज़ायका अलग सा है मेरे लफ़्ज़ों का, के कोई समझ नहीं पाता, कोई भूला नहीं पाता।

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
याद रखना वही इंसान तुम्हारी परवाह करता है जो तुम्हारी खामोशी को समझता है
शोर की तो उम्र होती हैं
ख़ामोशी तो सदाबहार होती हैं
आप के बाद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है
ज़िंदगी की लंबाई नहीं बल्कि गहराई मायने रखती है।

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
खैर मंजिल तो ना मिली, लेकिन सफर बहोत खूबसूरत था उसके साथ
पनाह मिल जाए रूह को जिसका हाथ छूकर
उसी हथेली पर घर बना लो
कौन कहता है हम झूठ नहीं बोलते

एक बार खैरियत पूछ के तो देखिये

ALSO CHECK OUT :

इच्छाएं बड़ी बेवफा होती हैं
कमबख्त पूरी होते ही बदल जाती हैं

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
तक़लीत खुदी काम हो गयी, जब अपनों से उम्मीद कम हो गयी
बहुत अंदर तक जला देती हैं,
वो शिकायते जो बया नहीं होती
इक ज़रा चेहरा उधर कीजिये, इनायत होगी आप को देख के, बड़ी देर से मेरी सांस रुकी है
कभी-कभई लगता है वो बचपन ही ठीक था दाँत टूटते थे मगर दिल नहीं

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
मैं दिया हूँ! मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं
थोड़ा सा रफू करके देखिये न

फिर से नै सी लगेगी, ज़िन्दगी ही तो है

बहुत मुश्किल से करता हु
तेरी यादों का कारोबार
माना मुनाफा कम है
पर गुज़ारा हो जाता है

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
सुना हैं काफी पढ़ लिख गए हो तुम
कभी वो भी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते हैं
जीतने के बाद तो सारी दुनियाँ गले लगाती है, हारने के बाद जो गले लगाए वही अपना होता है
परेशां है इस बात पर वह
कि उन्हें कोई समझ नहीं पाया
जरा सोच कर देखो
तुमने कितनों को समझ लिया

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
हम तो अब याद भी नहीं करते
आप को हिचकी लग गई कैसे
मंजिलों से गुमराह भी कर देते है कुछ लोग, हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता
जिस की आंखों में कटी थीं सदियां
उस ने सदियों की जुदाई दी है
रोई है किसी छत पे, अकेले ही में घुटकर
उतरी जो लबों पर तो वो नमकीन थी बारिश
हँसता तो मैं रोज़ हूँ
मगर खुश हुए ज़माना हो गया

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
बहुत अंदर तक जला देती हैं,

वो शिकायतें जो बयां नहीं होती

कुछ रिश्तो में मुनाफा नहीं होता
पर जिंदगी को अमीर बना देते हैं

 

Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
Gulzar Shayri in Hindi-गुलज़ार शायरी इन हिंदी
वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं
हम भूल गए हैं रख के कहीं
चांदी उगने लगी है बालों में , के उम्र तुम पर हसीन लगती है
जितना गहरा रिश्ता, उतनी ज्यादा उम्मीदें!
और जितनी ज्यादा उम्मीदें उतनी गहरी चोट
इतना क्यों सिखाये
जा रही है ज़िन्दगी
हमें कौन सी सदियाँ
गुज़ारनी है यहाँ
यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता
ALSO CHECK OUT :

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