[100+] किसी को जलाने की एटीट्यूड शायरी

किसी को जलाने की एटीट्यूड शायरी

किसी को जलाने की एटीट्यूड शायरी-क्या आप लोगों को ईर्ष्या करना चाहते हैं? अगर हां, तो यह ब्लॉग पोस्ट आपके लिए है। यहां कुछ उद्धरण दिए गए हैं जो आपके दोस्तों और परिवार को ईर्ष्या से हरा देंगे

चाहे आप ईर्ष्यालु नफरत करने वालों की अवहेलना कर रहे हों, या अपनी खुद की ईर्ष्या की भावनाओं के माध्यम से काम कर रहे हों, यहां आपको प्राप्त करने के लिए सबसे अच्छे किसी को जलाने की एटीट्यूड शायरी उद्धरणों की एक सूची है।

ईर्ष्या महसूस करने के लिए एक अच्छी भावना नहीं है। यह भावना आपके पूरे अस्तित्व का उपभोग कर सकती है और आपको वह बना सकती है जिसे “हरा राक्षस” कहा जाता है।

किसी को जलाने की एटीट्यूड शायरी

 

मत करो मेरी पीठ के पीछे बात जाकर कोने में। वरना पूरी जिंदिगी गुज़र जाएगी रोने में।
मुझे मत देखो हजारो में, हम बिका नहीं करते बजारो में
समझदार को इशारा काफी बच्चो को गुब्बारा काफी !
तू क्या हमारी बराबरी करेगा पगले हमारे तो नींद में भी खींची हुई फोटो भी लोग Dp लगाते है !”
मैं दुनिया को सफाई क्यों दू मैं जो हु वो हु सबको गवाही क्यों दू !
मेरी पहचान बस इतनी जान लो बेनाम नहीं मुझे तुम गुमनाम जान लो !
दो चार दिन की Personality नहीं जो लोग हमें भूला दे, उस गब्बर जैसा हूँ जिसका नाम बोलके माँ अपने बच्चे को सुला दे !
जिंदिगी की यही रीत है पीठ पीछे सब कमीने सामने सब Sweet हैं।
लगता है आज जिंदिगी खफा है ! चलिए छोड़िये कौन सी पहली दफा है
न मैं गिरा न मेरी उम्मीदों की दीवारे गिरी ! पर मुझे गिराने में कई लोग बार बार गिरे
माना की तेरी एक आवाज़ से भीड़ ही जाती है ,लेकिन हम भी माहिर है हमारी एक ललकार से पूरी भीड़ बिखर जाती है
आये हो निभाने जब किरदार जमी पर कुछ ऐसा कर चलो की जमाना मिसाल दे
वैसे तो पूरी दुनिया हमारी दीवानी है। हाँ भूल गए है कुछ लोग औकात अपनी, वक्त रहते उन्हें उनकी औकात याद दिलानी है।
लोग डुबाने के तरीके खोजते रह गए और मैं ”तैरना” सिख गया
हम अपनी इस अकड़ पर थोड़ा गरुर करते है किसी से प्‍यार हो जाए ना, नफरत भरपूर करते है।
पहचान तो सबसे है पर भरोसा आज भी खुद पर है
हमारी शराफत कायूँ कतरे कतरे मे फायदा ना उठाओ, कयामत आ जायेगीजब हम बदमाशी पर होंगे
अक्‍सर वही लोग उठाते हैं  हम पर उँगलियाँ, जिनकी हमे छुने की औकात नहीं होती
वो बोले ताली तो हाथ से बजती है मेने चमाट मार के बजा दी एक हाथ से ताली।
समझदार को इशारा काफी बच्चो को गुब्बारा काफी।
एक बार वक्‍त को बदलने दो,तुने सिर्फ बाजी पलटी है,मैं जिंदगी ही पलट दुँगा
जिंदिगी की यही रीत है पीठ पीछे सब कमीने सामने सब Sweet हैं !
कुछ देर की ख़ामोशी है फ़िर कानों में शोर आयेगा तुम्हारा तो वक़्त आयेगा हमारा तो दौर आएगा
हमारे हाल पे हसने वाले शोख से हँसे, हमारी राह नापना आसान नहीं,
लोगो का वक़्त आता हे ध्यान रख लेना,
अपना डोर आएगा हम खुद लाएंगे आप लोग देख लेना।
“तू क्या हमारी बराबरी करेगा पगले हमारे तो नींद में भी खींची हुई फोटो भी लोग Dp लगाते है।”
सही को सही और गलत को गलत
कहने की हिम्‍मत रखता हूँ
इसलिए आजकल रिश्‍ते कम रखता हूँ
मुझसे जलने वाले जल जल के काले हो गए ! मुझपे मरती उनकी बहने वो मेरे साले हो गए !
मैं दुनिया को सफाई क्यों दू मैं जो हु वो हु सबको गवाही क्यों दू।
इश्‍क और हमारा ताल्लुक हुआ ही नहीं क्‍योंकि इश्‍क गुलामी चाहता है और हम आजादी
इसी बात से लगा लेना मेरी शोहरत का अंदाजा,वो मुझे सलाम करते है जिन्‍हे तू सलाम करता है
वैसे तो पूरी दुनिया हमारी दीवानी है ! हाँ भूल गए है कुछ लोग औकात अपनी, वक्त रहते उन्हें उनकी औकात याद दिलानी है
मामूली शायर हे तू कुछ बड़ा कर बताने को, मेने कहा मेरे चंद शब्द ही काफी हे तेरे शहर में आग लगाने को।
हमारे नसीब में आप नहीं इससे खुश मत होना,बल्कि आपके नसीब में हम नहीं इसका गम मनाओ।
उसकी निगाहो में जलन इतनी ज्यादा थी,अपनी थाली में काम मेरी में उसकी नजर ज्यादा थी।
तुम जलन बरकरार रखना हम जलवे बरकरार रखेंगे
वो बोले ताली तो हाथ से बजती है मेने चमाट मार के बजा दी एक हाथ से ताली।
न में काबिल ऐ तरीफ हु न कबीले तहसीन,एक सुलजा हुआ इंसान हु उलझे मिज़ाज का
खामोश हु बेज़ुबान नही ! शिकारी हु किसी का शिकार नहीं
मैने खेल हमेशा खुद के दम पर खेले है इसलिए तेरे जैसे आज मेरे चेले है
राज तो हमारा हर जगह पर है ! पसंद करने वालो के दिलो में, न पसंद करने वालो के दिमाग में !
भाड़ में जाए लोग और लोगो की बातें,हम तो वैसे ही जिएंगे,जैसे हम जीना चाहते है

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